by Verma Ashish | Nov 17, 2019 | Uncategorized
दधी गुण वर्णन दही रस एवं पाक में अम्ल होता है, ग्राही अर्थात मल को बंधने वाला, उष्ण और वातनाशक होता है. अग्नि वर्धक एवं शोथकरक होता है. भोजन के प्रति रूचि को बढ़ता है. जाडा लगकर आने वाले विषम ज्वर में, पीनसरोग में और मूत्रकृच्छ रोग में दही का प्रयोग हितकर है. गृहणी रोग...
by Verma Ashish | Nov 16, 2019 | Uncategorized
सामान्य दूध के गुण सामान्य दूध रस अवेम पाक में मधुर होता है. सामान्य दूध स्निग्ध होता है और ओजस और रस आदि धातुओं को बढ़ने वाला होता है. ये वात और पित्त दोष का शमन करता है, वीर्य को बढ़ता है और कफ को भी बढ़ने वाला होता है. पचने में गुरु और शीतल होता है. गाय के दूध के गुण...
by Verma Ashish | Jul 19, 2019 | Ayurveda
द्रव शब्द अनेक अर्थों का वाचक है जैसे – घोड़े की तरह दौड़ना, चूना, रिसना, गीला, टपकना इत्यादि. प्राचीन भारतीय विद्वानों के मतानुसार जल तत्व की उत्पत्ति अग्नि तत्व से हुई है. वे जल को आप कहते हैं – जिसका अर्थ है – सर्वत्र व्याप्त. जल तथा बर्फ से भी भाप...
by Verma Ashish | Apr 24, 2019 | Ayurveda
वात, पित्त और कफ आदि दोषों का और पुरीष आदि शारीरिक मलों का अगर समय पर शोधन न किया जाय तो वे अधिक कुपित होकर शारीर का विनाश भी कर सकते हैं. उपचारों के द्वारा शांत किये गए दोष पुनः कुपित हो सकते हैं, पर जिन दोषों को वमन, विरेचन आदि संशोधन क्रियाओं के द्वारा शुद्ध किया...
by Verma Ashish | Dec 25, 2018 | Ayurveda
रोगानुत्पादनिय अष्टांगहृदयं का चौथा अध्याय है. इसका अर्थ है रोगों की उत्पत्ति की रोकथाम. वो प्रयास जिसके कारण रोगों से बचा जा सके. आयुर्वेद में स्वास्थ्य की रक्षा को सर्वप्रथम महत्वपूर्ण माना गया है. अगर आप आहार-विहार आदि दिनचर्या और ऋतुचर्या का ध्यान रखें तो रोगों से...